मोरें प्रौढ़ तनय सम ग्यानी।
बालक सुत सम दास अमानी॥
(मानस 3। 43। 4)
(11। 29। 17)
(11। 29। 18)
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॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः॥