(मानस 7। 98। 1)
* यहाँ “सहचरितासहचरितयोर्मध्ये सहचरितस्यैव ग्रहणम्”—व्याकरणके इस न्यायके अनुसार यज्ञ, दान और तपके
साहचर्यसे “कृतम्” पदसे शास्त्रीय कर्म ही लिये जायँगे।
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॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः॥