* अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः। (गीता 10। 2)
“तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये” (गीता 15। 4)
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॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः॥